किसानों के नाम पर राजनीति

दिल्ली सीमा पर आंदोलनरत किसानों ने गृह मंत्री अमित शाह की अपील भी ठुकरा दी है। इससे साफ़ जाहिर है कि किसान आंदोलन के नाम पर सिर्फ राजनीति हो रही है। वैसे भी इस आंदोलन पर किसानों की बजाय अवांछित तत्व हावी है। केंद्र सरकार द्वारा किसानों की समृद्धि के लिए लाए गए कृषि कानून को किसान विरोधी बताकर कांग्रेस, आप और कुछ अन्य दल राजनीति कर रहें हैं। मूल मुद्दे पर बात करने की बजाय किसानों को भड़काकर दिल्ली सीमा पर जमा कर दिया है। कुछ किसान बुराड़ी अवश्य पहुंचे हैं, लेकिन इस पूरे आंदोलन का कोई नेता नहीं होने से यह आंदोलन अनियंत्रित हो गया है। हरियाणा, पंजाब और दिल्ली में कांग्रेस अपनी राजनीतिक रोटियां सेक रही है, तो उत्तर प्रदेश में किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत भी बातचीत की बजाय दिल्ली जाने पर अड़े हुए हैं। दरअसल यह पूरा आंदोलन किसानों के नाम पर राजनीतिज्ञ और कुछ आवांछित तत्व अपनी महत्वाकांक्षा पूरी करने के लिए कर रहे हैं। क्योंकि यदि ऐसा नहीं है तो फिर खुद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बातचीत के प्रस्ताव और बीती रात गृह मंत्री अमित शाह की अपील को क्यों ठुकराया जा रहा है। इससे साफ़ जाहिर है कि मुद्दों के अभाव में किसान आंदोलन को भ्रमित कर दिया गया है। ऐसे में अब इस आंदोलन का भविष्य क्या होगा कहा नहीं जा सकता। एंकर - देश के किसानों को वर्षों से भ्रमित रखने वाली कांग्रेस को मोदी सरकार की किसानों को समृद्ध करने की नीति रास नहीं आ रही है। इससे कांग्रेस को ग्रामीण वोट बैंक टूटने का खतरा नज़र आ रहा है।
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